बुधवार, 1 जुलाई 2020

चीनी सामान का बहिष्कार

   चीनी सामान का बहिष्कार
     

         प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा देश में बने उत्पाद खरीदने के लिए आमजन से  अपील की गई है। इसके महज एक दिन पश्चात् केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी ऐलान किया है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के सभी कैंटीन में 10 लाख जवानों के लिए 1 जून से सिर्फ स्वदेशी उत्पाद बिकेंगे।
उन्होंने इस बाबत देश की जनता से भी अपील की है कि आप देश में निर्मित उत्पाद ही ज्यादा-से-ज्यादा इस्तेमाल करें।

गौरतलब है कि सीएपीएफ में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल, नेशनल सिक्योरिटी गाड्र्स शामिल हैं। इन बलों की कैंटीन से 2800 करोड़ रुपया का सामान खरीदा जाता है।

स्वदेशी पर महात्मा गांधी के विचार

         महात्मा गांधी स्वदेशी के हिमायती थे। उन्होंने आजादी के संघर्ष के दौरान स्वदेशी आंदोलन चलाया। स्वदेशी पर उनका विचार इस प्रकार है,‘‘स्वदेशी की भावना हमें दूर को छोड़कर अपने समीपवर्ती गांव, शहर व प्रदेश का ही उपयोग और सेवा करना सिखाती है। हमें अपने पड़ोसियों और स्थानीयों के द्वारा बनाई गई वस्तुओं का ही उपयोग करना चाहिए। इससे भारत का हर गांव और शहर एक स्व-आश्रित व स्वयं में पूर्ण इकाई बन जाएगा।

शिक्षाविद और इनोवेटर सोनम वांगचुक की मुहिम

          भारत-चीन टकराव के मध्य शिक्षाविद और इनोवेटर सोनम वांगचुक ने चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने का अभियान आरंभ किया है। उन्होंने चीन को सबक सिखाने और उनकी आर्थिक स्थिति को कमजोर करने के लिए एक मुहिम छेड़ी है।

        उनका कहना है,‘‘अभी हम निर्माण, हार्डवेयर, दवा, मेडिकल उपकरण, चप्पल-जूते और इलेक्ट्रानिक्स व इलेक्ट्रिकल चीजों के लिए चीन पर निर्भर हैं। हमारे देश में इन सामानों का उत्पादन महंगा होता है, लेकिन चीनी सामान सस्ता मिलता है। यहीं देश की जनता को समझना होगा कि इन सामानों को बेचकर चीन अस्त्र-शस्त्र बनाता है और हमारे खिलाफ ही इस्तेमाल करता है। इसलिए हमें चीनी सामान का बायकाट क्रमबद्ध तरीके से करने की जरूरत है।’’


उन्होंने एक उदाहरण देकर समझाया, ‘‘जैनधर्मी लहसुन-प्याज व मीट-मटन नहीं खाते। वे प्रतिबद्ध हैं कि चाहे कुछ हो जाए, वे इसका सेवन नहीं करेंगे। नतीजतन, इसका असर बाजार पर पड़ा। ऐसे भोजनालय आरंभ हुए, जो शुद्ध शाकाहारी हैं। बदलती मांग ने नया बाजार विकसित किया। जिस तरह जैनियों के लिए जैन फूड बनाया जाता है, उसी तरह चीन पर निर्भरता खत्म करने के लिए गैरचायनीज बाजार खड़ा करना होगा।’’

मेड-इन-इंडिया मुहिम

       यह सत्य है कि चीन की कमर तोड़ने के लिए हमें स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करना चाहिए। मेड-इन चायना का बहिष्कार कर मेड-इन इंडिया को अपनाना होगा। भारत, चीन से हर साल 4.40 लाख करोड़ का सामान खरीदता है और 1.10 लाख करोड़ का सामान चीन भेजता है। इसलिए यह जरूरी है कि आयात घटाया जाए और निर्यात बढ़ाया जाए।

        यही नहीं, सरकार चीनी उत्पादों पर ड्यूटी बढ़ाता है, तो 1 लाख करोड़ का लाभ होता है। केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने लोगों से जहां चीनी सामान के बहिष्कार की अपील की है, वहीं चीनी उत्पादों पर बीआईएस के गुणवत्ता नियम सख्ती से लागू करने की बात कही है।


गलवान घाटी में 20 भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद 7 करोड़ दुकानदारों के संगठन कैट ने मुहिम आरंभ किया है-भारतीय सामान-हमारा अभियान। कैट ने चीनी सामानों की करोल बाग में होली जलाई है। कैट ने भारतीय अभिनेताओं और खिलाड़ियों से अपील की है कि वे चीनी सामान का विज्ञापन न करें।


       प्रधानमंत्री ने भी अपील की है कि व्यापारी हौसला बुलंद रखकर आत्मनिर्भर अभियान की अगुवाई करें। वहीं भारतीय रेलवे ने चीनी कंपनी का 471 करोड़ का ठेका और पार्ट लेने का करार रद्द कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने भी भविष्य में चीनी कंपनियों के साथ कोई समझौता नहीं करने को कहा है।


      उधर केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवाले ने कहा है कि चीन धोखेबाज देश है। भारत में चायनीज फूड बेचनेवाले सभी रेस्टोरेंट और होटल बंद कर दिए जाने चाहिए।


       इधर महाराष्ट्र सरकार ने 5020 करोड़ के तीन बड़े समझौते रोक दिए है, जो उन्होंने चीनी कंपनियों के साथ किए थे। गोवा सरकार का भी ऐसा ही संकेत है।

राज्यों में चीनी घुसपैठ      

       भारत के राज्य सरकारों तक में चीनी कंपनियों की घुसपैठ है। इनमें गुजरात राज्य चीनी निवेश के मामले में अग्रणी है, जहां 28 हजार करोड़ का निवेश हुआ है। इसके अलावा हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश में चीनी कंपनियां छाई हुई हैं। यही नहीं, ई-कामर्स, मीडिया/सोशल मीडिया और लाजिस्टिक क्षेत्र की 75 से ज्यादा कंपनियों में चीनी निवेश है। आशय यह कि स्टार्टअप की 60 प्रतिशत से अधिक कंपनियों में चीनियों का पैसा बोल रहा है।

चीन का व्यापार        

         भारतीय वाणिज्यिक मंत्रालय के अनुसार, चीन भारत को स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिकल उपकरण, खाद, आटो पार्ट, स्टील उत्पाद, टेलीकाम उपकरण, मेट्रो रेल कोच, लोहा, फार्मास्युटिकल सामग्री, केमिकल, बच्चों के खिलौने, घरेलू उपकरण, पटाखे, फुलझड़ियां, ईश्वरों की मूर्तियां, मच्छर मारने का इलेक्ट्रानिक रैकेट आदि-इत्यादि सामान कम दर पर बेचता है। यह आयात सकल भारतीय आयात का 14 प्रतिशत है।

       यही नहीं, उसने 150 से अधिक मुल्कों को कर्ज में जकड़ रखा है। इन मुल्कों को उनके द्वारा दिया गया कर्ज डायरेक्ट लोन और टेªड क्रेडिट के रूप में करीब 112.50 लाख करोड़ रुपए का है।


         यह वैश्विक जीडीपी का 5 प्रतिशत के बराबर है, जो विश्वबैंक व मुद्राकोष से भी बड़ा कर्जदाता है। भारत में भी चीन का निवेश और प्रोजेक्ट 26 अरब डालर के आसपास है।



चीन की नीयत खोटी       

       चीन का तमाम पड़ोसी देशों से सीमा-विवाद है। जापान, फिलिपींस, वियतनाम, ताइवान, तिब्बत, नेपाल, मलेशिया यहां तक कि रूस उसके विस्तारवादी कुनीति से परेशान हैं। वह एक साम्राज्यवादी देश है, जिसकी कुदृष्टि हमेशा अपने पड़ोसियों पर लगी रहती है।

       यही नहीं, वह दुनियाभर में अपने सैनिक अड्डे बना रखा है। विश्व के तमाम देशों का यही आरोप है कि कोरोनावायरस का जनक वही है। अमेरिकी राष्ट्रपति तक ने उसपर खुलेआम आरोप लगाया है कि कोरोना वायरस प्राकृतिक नहीं, वुहान की लैब से निकला चीनी वायरस है।


       इतना ही नहीं, वह भारत को नीचा दिखाने के लिए पाकप्रायोजित आतंकवादियों तक का समर्थन करता है और सुरक्षा परिषद में अन्य देशों के द्वारा आतंकियों के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर बारबार वीटो करता रहता है।
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विशेष टीप :: वीरेंद्र देवांगन के साहित्यिक ई-रचनाओं का अध्ययन करने के लिए google crome के माध्यम से amazon.com /virendra Dewangan से सर्च किया जा सकता है।

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